Contract Employees के लिए बड़ी खुशखबरी: अब दो महीने में होगा नियमितीकरण, खत्म होगी अनिश्चितता– देश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से नियमितीकरण (Permanent Job) की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए अब उम्मीद की नई किरण जगी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार किसी भी संविदा कर्मचारी का शोषण नहीं कर सकती और उन्हें वर्षों तक अस्थायी पदों पर रखकर स्थायी नौकरी से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला?
दो Contract Employees ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वे 1979 और 1982 से लगातार सरकारी विभाग में काम कर रहे थे। 40 साल से ज्यादा सेवा देने के बाद भी उन्हें स्थायी नहीं किया गया। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई कि इतने लंबे समय तक सेवा करने के बावजूद उन्हें नियमित न रखना अन्याय है।
इस पर कोर्ट ने कहा —
- इतने लंबे समय तक निरंतर सेवा करने वाले कर्मचारियों को नियमित न करना गलत है।
- राज्य एक “आदर्श नियोक्ता” है, इसलिए वह अपने कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकता।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
- हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि 6 हफ्तों के भीतर उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए।
- कोर्ट ने साफ कहा कि जब कर्मचारी सालों से स्थायी प्रकृति का काम कर रहे हैं, तो उन्हें अस्थायी पद पर रखना उचित नहीं है।
- यह निर्णय सभी संविदा कर्मचारियों के लिए एक उम्मीद की नई शुरुआत है।
क्यों है यह फैसला खास?
- संविदा कर्मचारियों को स्थायी नौकरी का अधिकार मिला
- भविष्य में अन्य राज्यों पर भी इसका असर हो सकता है
- सरकार को अब नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है
- अब संविदा कर्मियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन, पेंशन, नौकरी सुरक्षा और अन्य लाभ
संविधान क्या कहता है?
| अनुच्छेद | क्या कहता है? |
|---|---|
| अनु. 14 | सभी के लिए समानता का अधिकार |
| अनु. 16 | समान अवसर के साथ सार्वजनिक नौकरी का अधिकार |
नोट – कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों को 30-40 वर्षों तक अस्थायी नौकरी में रखना इन दोनों अनुच्छेदों के खिलाफ है।
अब आगे क्या होगा?
- राज्य सरकार को सभी ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करनी होगी,
- जिन्होंने लंबे समय से संविदा/अस्थायी पदों पर काम किया है।
- उन्हें नियमित नियुक्ति के आदेश जारी किए जाएंगे।
- यह प्रक्रिया अगले 2 महीनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों के जीवन में खुशी की लहर
इस फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों ने इसे “जिंदगी भर की दिवाली” जैसा तोहफा बताया है।
अब उन्हें न सिर्फ नौकरी की सुरक्षा मिलेगी, बल्कि —
- पेंशन
- मेडिकल सुविधा
- प्रमोशन के अवसर
- और एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी मिलेगा।
निष्कर्ष
यह फैसला न सिर्फ दो लोगों के लिए, बल्कि देश के हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए एक नया रास्ता खोलता है। अब सरकार पर जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों के साथ न्याय करे और उन्हें वह सम्मान दे जिसके वे हकदार हैं।










